पीकेएल स्टार राहुल बोले, "कबड्डी खेलते रहना चाहता हूं"

मुंबई: प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) में एक शानदार डिफेंडर के रूप में अपनी पहचान बना चुके हरियाणा स्टीलर्स के राहुल सेठपाल ने पीकेएल सीजन 11 की ट्रॉफी अपने नाम की, 71वें सीनियर नेशनल कबड्डी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता और टीम के सर्वश्रेष्ठ राइट कॉर्नर डिफेंडर के रूप में खुद को साबित किया। पानीपत के एक छोटे से गांव से पेशेवर कबड्डी खिलाड़ी बनने तक का उनका सफर प्रेरणादायक रहा है। इस सफर को उन्होंने पीकेएल के आधिकारिक यूट्यूब चैनल के शो ‘राइज़ ऑफ ए स्टार’ में साझा किया।
बपोलिया गांव से अपनी जड़ों को याद करते हुए राहुल ने कहा, "मैंने बहुत कम उम्र में कबड्डी खेलना शुरू कर दिया था। हमारे गांव में एक टूर्नामेंट हुआ था, जिसमें जर्सी दी जा रही थी। मैंने सोचा कि खेलते हैं, और वहीं से मेरा कबड्डी का सफर शुरू हुआ।"
मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले राहुल को शुरुआत में अपने पिता का विरोध झेलना पड़ा, जो उनकी पढ़ाई को अधिक महत्व देते थे। "मेरे पिता भी चाहते थे कि मैं पढ़ाई पर ध्यान दूं," उन्होंने बताया। लेकिन उनकी मां हमेशा उनके समर्थन में रहीं। "उन्होंने हमेशा मुझ पर भरोसा किया। उनका कहना था कि अगर मैं बड़ा खिलाड़ी नहीं बन सका, तो भी कम से कम मेरे पास जीवन में एक बैकअप रहेगा।"
राहुल के करियर में एक बड़ा मोड़ तब आया जब नितिन रावल उनके मेंटर और सपोर्ट सिस्टम बने। नितिन खुद पीकेएल के बेहतरीन डिफेंडर्स में गिने जाते हैं, जिन्होंने 103 मैचों में 167 पॉइंट्स हासिल किए हैं। वह 2023 एशियाई खेलों में भारत के लिए स्वर्ण जीतने वाले राष्ट्रीय नायक भी हैं।
"नितिन रावल ने हर तरह से मेरी मदद की – आर्थिक और भावनात्मक दोनों रूप से। उन्होंने मेरे भाई और मुझे उस मुकाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई, जहां हम आज हैं," राहुल ने कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा। रावल की मदद ने उनकी स्कूल टीम में जगह बनाने में भी मदद की। "उन्होंने स्कूल प्रशासन से कहा कि अगर आपको मेरा खेल पसंद आता है तो रख लीजिए, वरना हटा सकते हैं।"
उनकी पहली बड़ी सफलता जूनियर नेशनल्स में दो स्वर्ण पदक जीतने से आई। "हमारी टीम को देखकर ऐसा नहीं लगता था कि हम पदक जीतेंगे। हमारे पास केवल दो रेडर और पांच डिफेंडर थे। मैं मुख्य खिलाड़ी नहीं था, सिर्फ अलग-अलग पोजीशन भर रहा था।" लेकिन सभी बाधाओं को पार करते हुए, उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के लिए स्वर्ण पदक जीता।
प्रो कबड्डी लीग ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी। 2019 में यू मुंबा द्वारा साइन किए जाने के बाद, उनकी पहली बड़ी उपलब्धि लीग के सुपरस्टार पवन सहरावत को टैकल करना था। "मैं रोमांचित था; मैंने लीग के टॉप रेडर को टैकल किया था!" इस प्रदर्शन ने टीम का ध्यान खींचा और उनके पेशेवर सफर की शुरुआत हुई।
हरियाणा स्टीलर्स ने उन्हें 40.7 लाख रुपये में खरीदा, और उन्होंने खुद को एक शीर्ष डिफेंडर के रूप में साबित किया। पीकेएल सीजन 11 की जीत उनके सपने के सच होने जैसा था। "टाइटल जीतना किसी सपने से कम नहीं था। हम हरियाणा से हैं, जहां कबड्डी की गहरी विरासत है। हमारी टीम में सुरेंदर नाडा जैसे दिग्गज रहे, लेकिन हमने इससे पहले कभी पीकेएल खिताब नहीं जीता था।"
सीजन 11 में, राहुल ने 24 मैचों में 73 टैकल पॉइंट्स हासिल किए, जिसमें 4 हाई-5 शामिल थे। अब तक उन्होंने पीकेएल में 80 मैच खेले हैं, जिनमें 196 टैकल पॉइंट्स, 30 सुपर टैकल और 13 हाई-5 दर्ज किए हैं।
लीग ने उनके जीवन में बड़े बदलाव लाए। "मध्यमवर्गीय परिवार से आने के कारण, जो चीजें आज मेरे पास हैं, वे कभी सिर्फ सपने हुआ करते थे," उन्होंने कहा। "लक्ज़री होटलों में रहना, अच्छा पैसा कमाना—यह सब पीकेएल ने दिया। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि इतना कमा पाऊंगा।"
आगे की योजनाओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "अब मैं सीनियर नेशनल्स खेल चुका हूं, और आगे भारत के लिए खेलना चाहता हूं। मैं कबड्डी में एक लंबी पारी खेलना चाहता हूं और अपनी एक विरासत छोड़ना चाहता हूं। मैं लगातार टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन कर रहा हूं और उन्हें मुझ पर भरोसा है। मेरा लक्ष्य कई और सालों तक खेलते रहना और अपने देश को गर्व महसूस कराना है।"